My expression in words and photography

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

एक पेड़

पेड़ और हम
मेरे घर के सामने
खड़ा है एक पेड़
देखने में सुन्दर
हरा भरा और शान्त
न जाने
कब से खड़ा है
इसने
हमारे पुरखों को
ज़रूर देखा होगा
शायद वो सब भी
खेले होंगे
इसकी छाया में

सब कुछ
बदल गया है आज
यहाँ पर रहने वाले लोग
इस पेड़ के पत्ते और डाली
अगर कुछ नहीं बदला तो
वह है इसकी छाया
मुफ्त में बाँटता है सबको
और देता है सुकून
चाहे मौसम सुहाना हो
या तपता हुआ जून
कितने बदल गए हैं
हम लोग
अपने पड़ोसियों को
कभी नहीं मिलते
बिना मतलब के
कोई बात नहीं करते
शायद
एक दूसरे को देख
खुश भी न होते हों

हम को भी
पेड़ जैसा बना दो न
हे सर्वशक्तिमान ईश्वर !
मिलजुल कर रहें
सब खुश
एक ऐसा दो हमें वर
बाँटें सबको प्राण वायु
और मिटा दें
धरती का प्रदूषण
फिर निर्मल बने
यह वातावरण
एक दूजे को देख
यूं मुस्कुराएँ
अगली पीढ़ी भी
हमें न भूल पाए !

3 टिप्‍पणियां:

  1. Behad hee sundar samashtiwadi bhav liye ek mukammal rachana ! badhai! aasha hai aur bhee aisee hee rachanayen padhne ko milengee. sadhuwad ! aabhar !!

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  2. पर्यावरण के प्रति प्रेरित करती सुन्दर कविता..

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  3. कविता पसन्द करने के लिए आप सब का आभारी हूँ. धन्यवाद!

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