My expression in words and photography

मंगलवार, 16 नवंबर 2010

बच्चों के लिए एक कविता

सबसे बड़ी सीख
चला जा रहा था मैं एक दिन
करने गांव की सैर
हुई दोपहर जंगल में फिर
नहीं जान की खैर
थोड़ी देर में आया हाथी
नहीं था मेरा कोई साथी
पहले तो कुछ दिल घबराया
बाद में फिर आगे बढ़ पाया
थोडा चलने पर रीछ मिला
उसने तो मुझ को देखा नहीं
पर मैंने उसको देख लिया
याद आई फिर एक कहानी
दो मित्रों की वही पुरानी
एक मित्र चढ़ गया पेड़ पर
दूजा गया लेट धरती पर
आया रीछ और गया सूंघ कर
दे गया सब को सन्देश नया
विश्वासघाती से बच कर रहना
नहीं कोई सीख इससे बढ़िया.

2 टिप्‍पणियां:

  1. बच्चों के लिए सीख देती हुई सुन्दर रचना !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ
    www.marmagya.blogspot.com

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  2. बहुत खूब...
    आपकी रचना पढ़ते वक़्त मुझे भी ये कहानी याद आ गयी... यादों को ताज़ा करवाने के लिए धन्यवाद.

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