My expression in words and photography

रविवार, 31 अक्तूबर 2010

आओ मनाएं इस बार दिवाली

दिवाली
आओ सजाएं इस बार दिवाली
दिए मोमबत्तियों से नहीं
बल्कि साक्षरता के प्रसार से
और भी होगी प्रकाशमान दिवाली!

आओ खेलें इस बार दिवाली
आतिशबाजी या पटाखों से नहीं
बल्कि बालश्रम मुक्ति से
और भी सुखमय होगी दिवाली!

आओ पूजें इस बार दिवाली
प्रदूषण एवं शोर से नहीं
बल्कि शांत वातावरण में
देवों के आने से रोशन होगी दिवाली!

आओ संवारें इस बार दिवाली
दिखावे की सजावट से नहीं
बल्कि सादगी व पवित्रता से
और भी शालीन होगी दिवाली!

आओ मनाएं इस बार दिवाली
मिठाइयों व पकवानों से नहीं
बल्कि मित्रों में मुस्कान बाँट कर
और भी रंगबिरंगी होगी दिवाली!

आओ दिखाएँ इस बार दिवाली
शराब या जुआ खेल कर नहीं
बल्कि सभी बुरे काम छोड़ कर
और भी सुरमय हो जायेगी दिवाली!

आओ देखें इस बार दिवाली
केवल अपनी ही आँखों से नहीं
बल्कि नेत्रदान संकल्प करके
जीवनोपरांत भी जगमग होगी दिवाली!

1 टिप्पणी:

  1. .
    "आओ देखें इस बार दिवाली
    केवल अपनी ही आँखों से नहीं
    बल्कि नेत्रदान संकल्प करके
    जीवनोपरांत भी जगमग होगी दिवाली"

    दीवाली पर आपकी कविता का climax अच्छा सन्देश पहुंचता है

    कुँवर कुसुमेश
    ब्लॉग:kunwarkusumesh.blogspot.com

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